गोल्फ़ बेटिंग: 150 खिलाड़ियों में से विजेता चुनना
चार दिन, 72 होल और बड़ा मैदान: गोल्फ़ में फ़ेवरेट भी अक्सर दस में से एक बार ही जीतता है।
अपडेट: 5 अक्तूबर 2026
गोल्फ़ बेटिंग बाक़ी खेलों से अलग है, क्योंकि यहाँ दो टीमें नहीं बल्कि सौ से ज़्यादा खिलाड़ी एक साथ खेलते हैं। सबसे बड़े टूर्नामेंट, यानी चार मेजर, साल भर फैले हैं और भारतीय समय में शाम से देर रात तक चलते हैं। इतने बड़े मैदान में सबसे पसंदीदा खिलाड़ी का भाव भी अक्सर 6.00 या उससे ऊपर रहता है।
गोल्फ़ के बाज़ार
- आउटराइट विजेता: पूरा टूर्नामेंट कौन जीतेगा; ईच-वे में शीर्ष कुछ स्थानों पर भी हिस्सा लौटता है।
- टॉप 5 / टॉप 10 / टॉप 20: खिलाड़ी लीडरबोर्ड में इन स्थानों के भीतर ख़त्म करे।
- हेड-टू-हेड: दो चुने हुए खिलाड़ियों में से कौन कम स्ट्रोक लेगा; बाक़ी मैदान से कोई मतलब नहीं।
- कट बनाना: दो राउंड के बाद खिलाड़ी आगे खेलेगा या बाहर होगा।
क्या देखें
कोर्स का मिज़ाज सबसे बड़ा संकेत है: लंबा कोर्स बड़े ड्राइवर के पक्ष में, तंग फ़ेयरवे सटीक खिलाड़ी के पक्ष में, और तेज़ ग्रीन पर पटिंग निर्णायक। हवा और सुबह-दोपहर का टी-टाइम भी पहले दो दिन फ़र्क़ डालते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोल्फ़ में फ़ेवरेट पर बेट क्यों कम लौटता है?
उलटा है: फ़ेवरेट का भाव भी ऊँचा होता है, क्योंकि बड़े मैदान में उसके जीतने की संभावना अक्सर 10-15 % ही होती है।
हेड-टू-हेड में दोनों बराबर रहें तो?
दोनों का स्कोर बराबर रहे तो "डेड हीट" या ड्रॉ के नियम लागू होते हैं; कुछ जगह बराबरी का अलग विकल्प भी दिया जाता है।